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केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कमजोर छात्रों पर अधिक ध्यान देंगे शिक्षक

केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है जो बारहवीं बोर्ड की परीक्षा में बैठने जा रहे हैं। इन विद्यार्थियों के बेहतर प्रदर्शन के लिए केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) ने विशेष रणनीति तैयार की है। इसके अंतर्गत हर छात्र को एक अलग पहचान देते हुए उसे एक श्रेणी में डाला गया है, ताकि उसे निर्धारित लक्ष्य पाने के लिए जरूरी सुविधाएं व सहयोग उपलब्ध कराया जा सके।

संगठन का लक्ष्य है कि बीते साल की अपेक्षा इस बार बारहवीं बोर्ड के नतीजे बेहतर हों और संगठन के स्कूल 100 फीसद पास के आंकड़े को हासिल करें। केवीएस के आयुक्त संतोष कुमार मल्ल ने कहा कि हमारी कोशिश न सिर्फ पुरानी कमियों को दूर करने की है, बल्कि इस साल बारहवीं में 100 फीसद पास का आंकड़ा हासिल करना भी है। इसके लिए खासतौर पर विशेष योजना बना काम किया जा रहा है।

केवीएस ने सभी स्कूलों को कहा है कि वो अपने यहां बारहवीं में अध्ययनरत विद्यार्थियों को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित करें। पहली श्रेणी उन विद्यार्थियों की है जो होनहार हैं। दूसरी श्रेणी में औसत छात्रों को रखा जाएगा। तीसरी श्रेणी उन छात्रों की है जो धीमी गति से अध्ययन करते हैं और उनके प्रदर्शन को लेकर संशय है। इस तरह तीनों ही श्रेणियों के लिए बारहवीं बोर्ड की परीक्षाओं की तैयारी अलग-अलग तरीके से होगी और हर श्रेणी के लिए लक्ष्य भी अलग-अलग निर्धारित किए गए हैं। यानी तीनों ही श्रेणियों के विद्यार्थियों के लिए संगठन व स्कूल स्तर पर अलग-अलग नीति के तहत काम हो रहा है जिससे कि अंतिम परिणाम बेहतर हो। 

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कृत्रिम गुर्दे दूर करेंगे डायलिसिस का दर्द, 2020 तक बाजार में होगा कृत्रिम गुर्दा

देश में 2.5 लाख लोग गुर्दे संबंधी बीमारी से मौत के मुंह में चले जाते हैं। बीमारी के आखिरी चरण में डायलिसिस या गुर्दा प्रत्यारोपण का विकल्प बचता है जो बहुत खर्चीला है। यह कृत्रिम गुर्दा अपेक्षाकृत सस्ता होगा। उम्मीद है कि 2020 तक कृत्रिम गुर्दो की उपलब्धता बाजार में होगी।

गुर्दे (किडनी) के मरीजों को नया जीवन देने और डायलिसिस की पीड़ा को कम करने के लिए वैज्ञानिक अब कृत्रिम गुर्दे के विकास पर लगे हुए हैं। सब कुछ ठीक रहा तो घुटनों के प्रत्यारोपण की तरह कृत्रिम गुर्दा ट्रांसप्लांट जल्द शुरू होगा। तीन चरणों में बंटे इस प्रोजेक्ट में वैज्ञानिक दूसरे चरण में पहुंच गए हैं।

■ घुटनों के प्रत्यारोपण की तरह ट्रांसप्लांट होगा संभव
■ देश में दिन प्रतिदिन बढ़ रही मरीजों की संख्या

लखनऊ स्थित बाबा साहब भीम राव अंबेडकर विवि के प्राणि विज्ञान विभाग के प्रयोगशाला में कृत्रिम गुर्दे पर अध्ययन चल रहा है। अंबेडकर विवि के कुलपति प्रो.आरसी सोबती के अनुसार यह प्रयोग मृत जानवर (भैंस-बकरी) के शरीर के अंगों में किया जा रहा है। मनुष्य की जीवित कोशिकाओं को मृत जानवर के शरीर में प्रविष्ट कर उसे निर्धारित तापमान एवं अवधि …

वाट्सएप पर भेजे मैसेज अब वापस बुला सकेंगे, रीकॉल’ के नाम से मिलने वाली सुविधा में मैसेज को वापस बुलाने का विकल्प

सैन फ्रांसिस्को : वाट्सएप इस्तेमाल करने वालों के लिए एक अच्छी खबर है। मैसेजिंग एप जल्द ही भेजे गए मैसेज को वापस बुलाने का विकल्प देने जा रहा है। ‘रीकॉल’ के नाम से मिलने वाली इस सुविधा में यूजर को पांच मिनट तक किसी भी भेजे गए मैसेज को वापस लेने का मौका मिलेगा।



वाट्सएप या किसी भी मैसेजिंग एप पर कई बार गलती से किसी के लिए लिखा मैसेज दूसरे के नंबर पर चला जाता है। ऐसी स्थिति में पछताने के अलावा विकल्प नहीं बचता है। वाट्सएप पर आने वाले दिनों में इस मुश्किल का हल मिलने की उम्मीद है। वाट्सएप के नए फीचर जांचने वाली वेबसाइट ने इस बारे में जानकारी दी है।

वेटिंग टिकट कंफर्म होगा या नहीं बताएगा रेलवे, बुकिंग करते समय स्क्रीन पर ही आ जाएगा टिकट कंफर्म होगा या नहीं

ट्रेन का आरक्षित टिकट लेते समय वेटिंग मिलने पर सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि यह कन्फर्म होगा या नहीं। इस परेशानी को दूर करने के लिए रेलवे व्यवस्था करने जा रहा है। इसके तहत आरक्षित टिकट लेते समय वेटिंग मिलने पर स्क्रीन पर यह भी दिखाया जाएगा कि सीट कन्फर्म होगी या नहीं। रेलवे बोर्ड ने इसके लिए सेंटर फॉर रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम (क्रिस) को सॉफ्टवेयर तैयार करने के लिए कहा है।


■ बुकिंग करते समय स्क्रीन पर ही आ जाएगा टिकट कंफर्म होगा या नहीं
■ क्रिस को साफ्टवेयर तैयार करने के लिए कहा गया


ट्रेनों में बीच के स्टेशनों का सीट का कोटा होता है। उस स्टेशन से कोई यात्री टिकट नहीं लेता है तो वेटिंग वाले यात्रियों को बर्थ उपलब्ध करने का प्रावधान है। इसके अलावा कई अन्य श्रेणी का भी कोटा होता है। इसके भी फुल नहीं होने पर वेटिंग वाले यात्री को बर्थ दी जाती है। वीआइपी कोटा छोड़ दें तो अधिकांश श्रेणी के आरक्षित बर्थ खाली रहती हैं। यही कारण है कि भीड़ के समय भी स्लीपर में सौ वेटिंग तक होने के बाद भी सीट कन्फर्म हो जाता है। लेकिन समस्या टिकट लेते समय होती है। व्यक्ति वेटिंग टिकट ले तो लेता है लेकिन उसे यह आइ…