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अब कुर्ता-पायजामा और सदरी में होगा दीक्षांत समारोह, छात्राओं के लिए सलवार सूट और कोटी का प्रस्ताव


  • कुर्ता-पायजामा और सदरी में होगा दीक्षांत समारोह

बीबीएयू बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी के 2015 के दीक्षांत समारोह में गाउन की विदाई तय हो गई है। प्रधानमंत्री के सभी विश्वविद्यालयों को लिखे गए पत्र के बाद बीबीएयू ने खादी के कपड़ों में दीक्षांत समारोह कराने का फैसला किया है। कुलपति द्वारा बनाई गई हाई पॉवर कमिटी ने अवधी स्टाइल के कुर्ते-पायजामा और सदरी में दीक्षांत कराने का सुझाव दिया है। वहीं छात्राओं के लिए सलवार सूट और कोटी का प्रस्ताव दिया गया है। यूनिवर्सिटी के दीक्षांत में 2010 में आए पूर्व राष्ट्रपति कलाम ने पहली बार यहां गाउन की खिलाफत की थी। इसके बाद से दीक्षांत समारोह के परिधान के लिए हर वर्ष गाउन के स्थान पर किसी दूसरे परिधान के चुनाव के लिए कमिटी बनती रही है।


बीते वर्ष एकेडमिक काउंसिल ने गाउन को हटाने का फैसला किया था। हालांकि परिधान तय न हो पाने के चलते इस पर अमल नहीं हो पाया था। हालांकि 2015 के दीक्षांत में अवधी वेशभूषा तय करने का निर्णय मई में एकेडमिक काउंसिल में लिया गया था। अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखा था। इसमें स्थानीय हैंडलूम को प्रोत्साहित करने के लिए दीक्षांत में वहां के फैब्रिक के इस्तेमाल की बात कही थी। इस पर बीबीएयू ने हाई पॉवर कमिटी बनाई थी। कमिटी की बैठक में फैब्रिक के रूप में खादी का इस्तेमाल किए जाने पर सहमति बनी थी। कमिटी ने कुर्ते-पजामे और सदरी को मुख्य वेशभूषा के रूप में शामिल करने का सुझाव दिया है। कुलपति ने भी इस पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है। 


दीक्षांत में टीचर्स, पीजी स्टूडेंट्स, पीएचडी स्टूडेंट्स के साथ ही एकेडमिक काउंसिल के सदस्यों व बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्यों के साथ ही मुख्य अतिथि की वेशभूषा का रंग तय किया जाना है। इस पर फैसला कुलपति के ऊपर छोड़ दिया गया है। कमिटी ने खादी के कुर्ते-पजामे व सदरी को दीक्षांत का मुख्य परिधान बनाए जाने का सुझाव दिया है। अभी कुछ और बिंदुओं पर चर्चा कर जल्द ही इस पर स्थिति स्पष्ट कर दी जाएगी। 

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वाट्सएप पर भेजे मैसेज अब वापस बुला सकेंगे, रीकॉल’ के नाम से मिलने वाली सुविधा में मैसेज को वापस बुलाने का विकल्प

सैन फ्रांसिस्को : वाट्सएप इस्तेमाल करने वालों के लिए एक अच्छी खबर है। मैसेजिंग एप जल्द ही भेजे गए मैसेज को वापस बुलाने का विकल्प देने जा रहा है। ‘रीकॉल’ के नाम से मिलने वाली इस सुविधा में यूजर को पांच मिनट तक किसी भी भेजे गए मैसेज को वापस लेने का मौका मिलेगा।



वाट्सएप या किसी भी मैसेजिंग एप पर कई बार गलती से किसी के लिए लिखा मैसेज दूसरे के नंबर पर चला जाता है। ऐसी स्थिति में पछताने के अलावा विकल्प नहीं बचता है। वाट्सएप पर आने वाले दिनों में इस मुश्किल का हल मिलने की उम्मीद है। वाट्सएप के नए फीचर जांचने वाली वेबसाइट ने इस बारे में जानकारी दी है।

नए साल में फ्री कॉल, BSNL भी अपने उपभोक्ताओं के लिए शुरू करेगा सेवा

☀ 2G व 3G उपभोक्ताओं को भी मिलेगा योजना का लाभ
कॉल वार में बीएसएनल ने भी कूदने की तैयारी कर ली है। यानी भारत संचार निगम लिमिटेड उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए नए साल में असीमित कॉल का तोहफा देगा। उपभोक्ताओं को डाटा रिचार्ज कराने पर फ्री कॉल की सुविधा दी जाएगी। इस योजना का लाभ टू जी व थ्री जी के उपभोक्ताओं को भी मिलेगा।


कंपनियों के बीच होड़ के चलते सस्ती कॉल के बाद उपभोक्ताओं को फ्री कॉल की सुविधा की दौड़ में बीएसएनएल भी शामिल होने जा रही है। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो ने अपने 4-जी उपभोक्ताओं को फ्री नेटवर्क के साथ ही फ्री कॉल की भी सुविधा प्रदान की है। इसके जवाब में बीएसएनएल ने लैंड लाइन पर 249 रुपये में अनलिमिटेड हाई स्पीड ब्रॉडबैंड की सुविधा उपलब्ध कराई। इसके अलावा रविवार को 24 घंटे और अन्य दिनों में रात 9 बजे से सुबह सात बजे तक फ्री कॉल की सुविधा मुहैया करा रहा है। इस सब के बाद भी इस सरकारी कंपनी के मोबाइल उपभोक्ता फ्री कॉल की सुविधा से वंचित थे।


बीएसएनएल के प्रबंध निदेशक अनुपम श्रीवास्तव ने पत्र के माध्यम से बताया कि विदेश की तर्ज पर नये साल में मोबाइल उपभोक्ताओं को भी फ्री कॉल…

वास्तविक खुशी की खोज में गुजरात टॉपर वर्शील शाह बने जैन संत

नई दिल्ली : इस साल 12वीं की परीक्षा में 99.99 पर्सेटाइल हासिल करने वाले गुजरात के 17 वर्षीय वर्शील शाह जैन संत बन गए हैं। अब वह सादा जीवन बिताएंगे और जैन मुनि सुवीर्य रत्न विजयजी महाराज के नाम से जाने जाएंगे।


वर्शील की दीक्षा तापी नदी के किनारे सुबह चार बजे शुरू हुई। इससे पहले ब्रम्हमुहूर्त में ढोल नगाड़ों के साथ उनकी शाही सवारी निकाली गई। शाही सवारी दीक्षा मंच तक पहुंची। दीक्षा मंच पर कई जैन संतों की उपस्थिति में वर्शिल की दीक्षा की प्रक्रिया पूरी की गई। वर्शील की मां अमीबेन और पिता जिगरभाई शाह बेटे के फैसले से खुश हैं। जिगर शाह अहमदाबाद में आयकर विभाग में पदस्थ हैं। मां गृहिणी हैं।




वे ऐसे परिवार में पले-बढ़े हैं, जहां टीवी या रेफ्रिजरेटर नहीं है। बहुत जरूरी होने पर ही बिजली का उपयोग होता है, क्योंकि शाह परिवार का मानना है कि बिजली उत्पादन के दौरान कई जलीय जीव-जंतु मारे जाते हैं।
दीक्षा लेने से पहले वर्शील ने कहा था कि उनका लक्ष्य भौतिकवादी दुनिया की चीजों के पीछे भागना नहीं, अविनाशी शांति को पाना है। यह तभी संभव होगा जब वह अपने पीछे हर चीज को छोड़ जैन संत बनें। वह बचपन से ही वास्तवि…